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Guru Purnima: इस साल कब है गुरु पूर्णिमा? जाने पूजा विधि एवं उपाए,गुरु की असीम कृपा पाने का दिन।


गुरु पूर्णिमा एक हिन्दू और जैन त्योहार है जो भारतीय कैलेंडर के अनुसार हर साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन गुरु भक्ति, गुरु के आदर्शों की पूजा, गुरु के शिक्षाओं के आदान-प्रदान और गुरु के ध्यान में ध्यान केंद्रित करने का महत्व दिया जाता है।

गुरु पूर्णिमा को हिंदू धर्म में व्यास पूजा या व्यास जयंती के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि इस दिन कोई विशेष व्यास पूजा की जाती है। व्यास रामायण, महाभारत और वेदों के व्याख्यानकार माने जाते हैं और उन्हें वेदव्यास भी कहा जाता है। इसलिए गुरु पूर्णिमा का दिन भी उनके समर्पण के लिए आदर्श माना जाता है।

यह त्योहार शिष्य-गुरु सम्बंध की महत्त्वपूर्णता को दर्शाता है और लोग अपने गुरुओं का आभार व्यक्त करते हैं। इस दिन विद्यार्थियों, विद्यालयों और शिक्षा संस्थानों में पूजा-अर्चना, साधु-संतों के सत्संग और विद्यालयों में गुरुदक्षिणा आदि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

Guru purnima images

गुरु पूर्णिमा हर साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। आषाढ़ मास हिन्दू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठा और आषाढ़ मासों के बीच में पड़ता है। यह तिथि हिन्दी पंचांग या हिन्दू कैलेंडर के अनुसार हर साल बदलती है, इसलिए इसकी निश्चित तारीख वर्ष और संस्कृति के आधार पर भिन्न हो सकती है।

गुरु पूर्णिमा इस साल 2 जुलाई 20:22 से शुरु होकर 3 जुलाई 17:09 पर समाप्त होगी

गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि एवं उपाए ।

गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि और उपाए विभिन्न संस्कृति और परंपराओं के अनुसार थोड़ी भिन्नता दिखा सकते हैं, लेकिन यहां कुछ सामान्य उपाय दिए जा रहे हैं जो गुरु पूर्णिमा की पूजा के दौरान अपनाए जा सकते हैं:

  • गुरु का पूजन: गुरु पूर्णिमा के दिन अपने प्रमुख गुरु का पूजन करें। इसके लिए आप गुरु की मूर्ति, चित्र या योग्य प्रतिमा को विशेष रूप से सजाएं और पूजा अर्चना करें।

  • गुरु मंत्र जाप: गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु मंत्रों का जाप करें। ये मंत्र गुरु की कृपा को प्राप्त करने में सहायक होते हैं। "ॐ गुरुभ्यो नमः" और "ॐ गुरु गंगेश्वराय नमः" जैसे मंत्रों का जाप कर सकते हैं।

  • चारित्र परिवर्तन: गुरु पूर्णिमा के दिन अपने जीवन में सकारात्मक चारित्र परिवर्तन करने का संकल्प लें। अपने गुरु के आदर्शों और उपदेशों का पालन करने का प्रयास करें और उनकी संदेशों को अपने जीवन में उतारें।

  • सत्संग और स्वयंसेवा: गुरु पूर्णिमा के दिन सत्संग (सत्य के साथी संगठन) में भाग लें और विशेष आयोजनों में स्वयंसेवा करें।

  • गुरु की कथा और सत्संग: गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु की कथा और उनके उपदेशों की सुनें और सत्संग में भाग लें। यह आपको गुरु के शिक्षाओं का संबोधन करेगा और आपको मार्गदर्शन प्रदान करेगा।

  • दान और दया: गुरु पूर्णिमा के दिन दान और दया करें। गरीबों को भोजन, वस्त्र, धनराशि या आवश्यकताओं के अनुसार दान करें।

याद रखें, ये उपाए सामान्य हैं और आप अपने आचार्य या गुरु के मार्गदर्शन में आकर विशेष रूप से पूजा विधि और उपाय निर्धारित कर सकते हैं।

Guru purnima kab hai

गुरु पूर्णिमा को हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया जाता है और इसे अपने गुरु की पूजा, सम्मान और आदर्श मान्यताओं का दिन माना जाता है। गुरु पूर्णिमा का महत्व निम्नलिखित कारणों से होता है:

  • गुरु शिष्य परंपरा का सम्मान: गुरु पूर्णिमा एक परंपरागत त्योहार है जो गुरु और शिष्य के बीच की महत्वपूर्ण रिश्ता को मान्यता देता है। इस दिन शिष्य अपने गुरु का आदर्श बनने का संकल्प लेते हैं और उन्हें सम्मानित करते हैं।

  • ज्ञान के महत्व का पुनरावलोकन: गुरु पूर्णिमा एक अवसर है जब शिष्य गुरु के प्रति अपनी आदर्श मान्यताओं को पुनरावलोकित करते हैं और उनसे ज्ञान, मार्गदर्शन और सत्य की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

  • आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण अवसर: गुरु पूर्णिमा पर, शिष्य अपने आध्यात्मिक उन्नति के लिए गुरु के पास जाते हैं और उनसे आध्यात्मिक विचारों और ज्ञान का लाभ लेते हैं। यह दिन आध्यात्मिक साधना और संयम के महत्व को भी दर्शाता है।

  • गुरु की महिमा का स्मरण: गुरु पूर्णिमा शिष्यों को गुरु की महिमा को स्मरण करने का अवसर देता है। इस दिन शिष्य गुरु के प्रति आभार और श्रद्धा का व्यक्त करते हैं और उनके द्वारा सिखाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।

  • संस्कृति और गुरु शिष्य परंपरा की रक्षा: गुरु पूर्णिमा हमें हमारी संस्कृति और गुरु शिष्य परंपरा की महत्वपूर्णता को याद दिलाता है। यह त्योहार शिष्यों को उनकी संस्कृति, विचारधारा और धार्मिक विरासत के प्रति समर्पित होने का बोध दिलाता है।

इस प्रकार, गुरु पूर्णिमा हमें गुरु के महत्व, शिष्य-गुरु के रिश्ते और आध्यात्मिक उन्नति की महत्वपूर्णता को याद दिलाता है। यह एक उत्कृष्ट अवसर है जब हम गुरु के प्रति आभार व्यक्त कर सकते हैं और उनसे अपने जीवन में मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

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