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Khatu Shyam:क्यों खाटू नरेश को हारे का सहारा कहा जाता है? जाने खाटू नरेश की पूजा विधि !


khatu shyam

खाटू श्याम, (khatu shyam) जिन्हें भगवान श्री कृष्ण के रूप में भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण एक अवतार माने जाते हैं। वे राजस्थान के एक प्रसिद्ध श्रीजी मंदिर, खाटू धाम में विराजमान हैं। खाटू श्याम को देवोत्थानी एकादशी के दिन जग मंगल के रूप में जगाते हैं।

खाटू धाम का इतिहास मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। यहां के मंदिर में विराजमान भगवान खाटू श्याम का दर्शन करने के लिए लाखों भक्त यात्रा करते हैं।

खाटू श्याम को अंधक व्रत और व्रज भक्ति के द्वारा प्रसन्न किया जाता है। वे प्रेम और समर्पण के प्रतीक माने जाते हैं और उनकी पूजा भक्तों को आनंद, शांति और समृद्धि की प्राप्ति में सहायता करने का मान्यताओं में विश्वास किया जाता है।

खाटू श्याम को महाभारत में "बर्बरीक" नाम से जाना जाता था। बर्बरीक भगवान कृष्ण के पौत्र (पुत्रपुत्री) थे और पांडवों के पक्ष में युद्ध करने वाले योद्धा थे। उन्होंने अपनी योग्यता और कौशल के कारण प्रशस्त आत्मघाती शस्त्र ब्रह्मास्त्र का वरदान प्राप्त किया था। महाभारत में, बर्बरीक की उपस्थिति महत्वपूर्ण होती है, और उनके योग्यता और सामरिक कौशल को महत्वपूर्ण रूप से प्रशंसा की गई है।


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खाटू श्याम को हारे का सहारा क्यों कहा जाता है खाटू श्याम को "हारे का सहारा" कहा जाता है क्योंकि उन्हें अपने भक्तों की समस्याओं और दुःखों का समाधान करने में विशेष शक्ति प्राप्त है। खाटू श्याम की भक्ति और पूजा का प्रमुख उद्देश्य है भक्तों को दुःख से मुक्ति प्रदान करना और संकटों से रक्षा करना। खाटू श्याम की कथा में, उन्हें अनेक ग्रामीण समस्याओं और रोगों के निवारण के लिए आहार, औषधि, रक्षा आदि के रूप में देवी राधा ने अपनी अवश्यकता प्रकट की थी। इसलिए, खाटू श्याम को "हारे का सहारा" कहा जाता है क्योंकि उन्होंने भक्तों की प्रार्थनाओं और अनुरोधों का प्रतिसाद देकर उन्हें समस्याओं से छुटकारा दिया था। इसलिए उन्हें अपार प्रेम, शांति, और सुख का स्रोत माना जाता है और उनकी भक्ति को मान्यताओं में विशेष महत्व दिया जाता है।


खाटू श्याम की पूजा विधि
  1. सफ़ाई और तैयारी: पूजा के लिए एक साफ़ और पवित्र स्थान का चयन करें। मंदिर या पूजा कक्ष को धूप, दीप, पुष्प, गंध आदि से सजाएं।

  2. पूजा सामग्री: खाटू श्याम की पूजा के लिए आपको नीचे दिए गए सामग्री की आवश्यकता होगी:

    • खाटू श्याम की मूर्ति या चित्र

    • पूजा का वस्त्र (रंगीन कपड़ा)

    • पुष्प (फूल)

    • दीप (दीया) और घी (बत्ती)

    • धूप बत्ती

    • प्रसाद (मिठाई या फल)

    • गंध (इत्र या गंध पत्ती)

    • जल (पूजा के लिए पानी)

    • आरती की थाली

    • पूजा के लिए कलश

3: पूजा की विधि:

  • पूजा की शुरुआत करने से पहले, शुद्ध मनसा खाटू श्याम का स्मरण करें।

  • पूजा के लिए विधि के अनुसार प्राण प्रतिष्ठा करें, जिसमें मूर्ति को प्राण प्रदान करना शामिल होता है।

  • पूजा के बाद, खाटू श्याम की मूर्ति को पुष्प, गंध, दीप आदि से सजाएं।

  • आरती करें और खाटू श्याम के नाम से मंत्र जपें।

  • प्रसाद को खाटू श्याम को अर्पित करें और फिर उसे सभी भक्तों को वितरित करें।


4: व्रत और उपासना: खाटू श्याम की पूजा के साथ-साथ, आप व्रत और उपासना भी कर सकते हैं। आप खाटू श्याम के नाम का जाप कर सकते हैं, उनकी कथा सुन सकते हैं और उनके द्वारा प्रदत्त व्रतों का पालन कर सकते हैं।


khatu shyam temple
खाटू श्याम जी की आरती

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।

खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे।

ॐ जय श्री श्याम हरे..

रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे।

तन केसरिया बागो, कुंडल श्रवण पड़े।

ॐ जय श्री श्याम हरे..

गल पुष्पों की माला, सिर पार मुकुट धरे।

खेवत धूप अग्नि पर दीपक ज्योति जले।

ॐ जय श्री श्याम हरे..

मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे।

सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे।

ॐ जय श्री श्याम हरे..

झांझ कटोरा और घडियावल, शंख मृदंग घुरे।

भक्त आरती गावे, जय-जयकार करे।

ॐ जय श्री श्याम हरे..

जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे।

सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे।

ॐ जय श्री श्याम हरे..

श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे।

कहत भक्तजन, मनवांछित फल पावे।

ॐ जय श्री श्याम हरे..

जय श्री श्याम हरे, बाबा जी श्री श्याम हरे।

निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे।

ॐ जय श्री श्याम हरे..




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